उत्तर प्रदेश में मेडिकल स्टोर के रिटेल ड्रग लाइसेंस की फ़ीस ₹3,000 है। यह सबसे आसान हिस्सा है। असल में यह तय करता है कि दुकान खुलेगी या नहीं: एक रजिस्टर्ड फ़ार्मासिस्ट जो लाइसेंस पर अपना नाम दे, कम से कम दस वर्ग मीटर की पक्की दुकान, और उन दवाओं के लिए कोल्ड स्टोरेज जिन्हें ठंडे में रखना होता है — और लाइसेंस मिलने से पहले ड्रग इंस्पेक्टर ख़ुद आकर यह सब देखता है।
छोटा जवाब: UP में मेडिकल स्टोर खोलने के लिए फ़ॉर्म 20 और 21 पर रिटेल ड्रग सेल लाइसेंस चाहिए, जिसके लिए फ़ॉर्म 19 पर निवेश मित्र पोर्टल से आवेदन होता है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) के मुताबिक टेक्निकल पर्सन के रूप में फ़ार्मासिस्ट, कम से कम 10 वर्ग मीटर की पक्की दुकान जिसमें अच्छा स्टोरेज और कोल्ड स्टोरेज हो, मालिकाना हक़ या किराये के कागज़ और दुकान का नक्शा, और ₹3,000 फ़ीस चाहिए। लाइसेंस मंज़ूर होने से पहले ड्रग इंस्पेक्टर दुकान की जांच करता है, और लाइसेंस ऑनलाइन मिलता है।
मेडिकल स्टोर के लिए कौन सा लाइसेंस चाहिए?
रिटेल ड्रग सेल लाइसेंस, जो एक साथ दो फ़ॉर्म पर मिलता है। FSDA UP की लाइसेंस टेबल में आवेदन फ़ॉर्म 19 और रिटेल लाइसेंस फ़ॉर्म 20 और 21 लिखे हैं। फ़ॉर्म 20 आम दवाओं के लिए है; फ़ॉर्म 21 शेड्यूल C और C1 की दवाओं के लिए, जिनमें इंसुलिन और वैक्सीन जैसी चीज़ें आती हैं। इसीलिए फ़ीस ₹1,500 + ₹1,500 लिखी जाती है — हर फ़ॉर्म के लिए एक।
उसी टेबल में बाकी लाइसेंस भी हैं, ताकि पता रहे कि आपको कौन सा नहीं चाहिए:
- होलसेल लाइसेंस: फ़ॉर्म 20B और 21B, आवेदन फ़ॉर्म 19 पर।
- रेस्ट्रिक्टेड लाइसेंस: फ़ॉर्म 20A और 21A, आवेदन फ़ॉर्म 19A पर।
- शेड्यूल X की दवाएं: रिटेल के लिए फ़ॉर्म 20F और होलसेल के लिए फ़ॉर्म 20G, आवेदन फ़ॉर्म 19C पर।
क्या मेडिकल स्टोर के लिए फ़ार्मासिस्ट ज़रूरी है?
हां, रिटेल लाइसेंस के लिए। FSDA UP की ज़रूरी शर्तों में लिखा है कि रिटेल लाइसेंस के लिए टेक्निकल पर्सन फ़ार्मासिस्ट होना चाहिए, और होलसेल के लिए फ़ार्मासिस्ट या कॉम्पिटेंट पर्सन। फ़ार्मासिस्ट सिर्फ़ फ़ॉर्म पर एक नाम नहीं है: वह FSDA पोर्टल पर अलग से टेक्निकल पर्सन के रूप में रजिस्टर होता है, ड्रग इंस्पेक्टर उसकी प्रोफ़ाइल जांचकर मंज़ूर करता है, और फिर फ़र्म उसे अपने आवेदन से जोड़ती (मैप करती) है।
अक्सर पूरा समय इसी स्टेप पर टिका होता है। अगर आप ख़ुद फ़ार्मासिस्ट नहीं हैं, तो पहले फ़ार्मासिस्ट ढूंढिए, और उनके पढ़ाई के सर्टिफ़िकेट तैयार रखिए, क्योंकि FSDA उन्हें मांगता है।
दुकान कितनी बड़ी होनी चाहिए?
FSDA UP के मुताबिक रिटेल या होलसेल लाइसेंस के लिए कम से कम 10 वर्ग मीटर, और दोनों एक साथ लेने हों तो 15 वर्ग मीटर। दुकान पक्की बनी हो, साफ़-सुथरी हो, और उसमें अच्छा स्टोरेज और कोल्ड स्टोरेज हो। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 का Rule 64 पूरे देश में यही सिद्धांत रखता है: लाइसेंस तभी मिलेगा जब लाइसेंसिंग अथॉरिटी संतुष्ट हो कि जगह ठीक है, दवाओं को सही हालत में रखने का इंतज़ाम है, और दुकान एक योग्य व्यक्ति की देखरेख में है।
मेडिकल स्टोर लाइसेंस के लिए कौन-कौन से डॉक्यूमेंट चाहिए?
FSDA UP ने सेल लाइसेंस के लिए ये डॉक्यूमेंट लिखे हैं। एक मालिक वाली एक रिटेल दुकान के लिए ये काम के हैं:
- आवेदक की नई फ़ोटो।
- पते और पहचान का सबूत।
- टेक्निकल पर्सन (फ़ार्मासिस्ट) के पढ़ाई के सर्टिफ़िकेट।
- बिल्डिंग के मालिकाना हक़ का सबूत — या किराये पर हो तो किराये का सबूत या मकान मालिक की NOC।
- दुकान का नक्शा।
- पिछले तीन साल के काम का ब्योरा।
पार्टनरशिप फ़र्म हो तो पार्टनरशिप डीड; कंपनी या LLP हो तो इनकॉर्पोरेशन सर्टिफ़िकेट और मेमोरेंडम-आर्टिकल्स; HUF, ट्रस्ट या सोसाइटी हो तो उसकी डीड या रजिस्ट्रेशन; और कोई अटॉर्नी आवेदन करे तो पावर ऑफ़ अटॉर्नी भी लगती है।
UP में मेडिकल स्टोर लाइसेंस की फ़ीस कितनी है?
रिटेल लाइसेंस के लिए ₹3,000। FSDA UP की फ़ीस लिस्ट:
- रिटेल लाइसेंस (फ़ॉर्म 20 और 21): ₹3,000 (₹1,500 + ₹1,500)।
- होलसेल लाइसेंस (फ़ॉर्म 20B और 21B): ₹3,000 (₹1,500 + ₹1,500)।
- रेस्ट्रिक्टेड लाइसेंस (फ़ॉर्म 20A और 21A): ₹1,000 (₹500 + ₹500)।
- शेड्यूल X रिटेल (फ़ॉर्म 20F) या होलसेल (फ़ॉर्म 20G): ₹500 हर एक।
इसी लिस्ट में लेट फ़ीस 2% प्रति महीना है, ज़्यादा से ज़्यादा छह महीने तक। फ़ीस निवेश मित्र से ऑनलाइन जमा होती है।
UP में ड्रग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
निवेश मित्र से, जो राज्य का सिंगल-विंडो पोर्टल है और आपको FSDA पोर्टल पर भेज देता है। FSDA UP की "How to Apply" शीट में ये स्टेप हैं:
- ईमेल ID और मोबाइल नंबर से निवेश मित्र पोर्टल पर रजिस्टर करें।
- रजिस्ट्रेशन के बाद ईमेल पर आए लॉगिन ID और पासवर्ड से लॉग इन करें।
- ईमेल वेरिफ़ाई करें और निवेश मित्र पर कॉमन एप्लिकेशन फ़ॉर्म भरें।
- यूनिट ID बनाएं और लाइसेंस के लिए आवेदन करें — आप FSDA पोर्टल पर पहुंच जाएंगे।
- वहां प्रोफ़ाइल पूरी करें और सही लाइसेंस फ़ॉर्म पर आवेदन करें।
- लाइसेंस फ़ीस निवेश मित्र से जमा करें।
- आवेदन विभाग के पोर्टल पर पहुंच जाता है।
इसके साथ, फ़ार्मासिस्ट fsdaup.gov.in पर "Registration of Technical Person" में अपना रजिस्ट्रेशन करता है, प्रोफ़ाइल पूरी करता है, और ड्रग इंस्पेक्टर की मंज़ूरी का इंतज़ार करता है। फिर फ़र्म लॉग इन करके "Technical Person mapping" खोलती है और फ़ार्मासिस्ट को जोड़ती है।
लाइसेंस मिलने में कितना समय लगता है?
FSDA UP के अपने प्रोसेस चार्ट में हर स्टेप का समय तय है। आवेदन में कमी हो तो वह आवेदक को सुधार के लिए वापस भेजा जाता है, ठीक करने के लिए 7 दिन। फिर आवेदन ड्रग इंस्पेक्टर के पास जांच के लिए जाता है, उसके लिए 10 दिन। जांच रिपोर्ट ठीक हो तो ड्रग लाइसेंसिंग अथॉरिटी लाइसेंस मंज़ूर करती है, उसके लिए 15 दिन, और आवेदक डिजिटल साइन वाला लाइसेंस डाउनलोड कर लेता है। जिस आवेदन की कमियां दूर न हों, वह रिजेक्ट हो जाता है।
ये हर स्टेप के लिए विभाग के तय समय हैं, कुल समय का वादा नहीं। असल में घड़ी तभी चलती है जब सारे डॉक्यूमेंट पूरे हों और फ़ार्मासिस्ट की प्रोफ़ाइल मंज़ूर हो चुकी हो — इसलिए ये दोनों काम पहले निपटा लेना अच्छा है।
क्या ड्रग लाइसेंस का रिन्यूअल कराना पड़ता है?
पुराने तरीके से नहीं। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स के मौजूदा Rule 63 के मुताबिक सेल लाइसेंस तब तक चलता रहता है जब तक हर पांच साल में रिटेंशन फ़ीस जमा होती रहे, और FSDA UP की फ़ीस लिस्ट में लाइसेंस और रिटेंशन, दोनों के आगे वही ₹3,000 लिखा है। अपने लाइसेंस पर आख़िरी तारीख़ नोट कर लीजिए; लेट फ़ीस वहीं से लगती है।
पहले दिन से क्या तैयार होना चाहिए?
लाइसेंस कागज़ी काम की शुरुआत है, आख़िर नहीं। पहली बिक्री से दो रजिस्टर ज़रूरी हैं। शेड्यूल H1 की हर दवा की बिक्री उसी वक़्त एक अलग रजिस्टर में जाती है और तीन साल रखी जाती है — हमारे फ़्री शेड्यूल H1 रजिस्टर फ़ॉर्मेट में नियम के मांगे सारे कॉलम हैं। और जो दुकान पहले दिन से एक्सपायरी के क़रीब वाला स्टॉक लिखती है, वह उसे समय पर डिस्ट्रीब्यूटर को लौटा पाती है, नुक़सान में नहीं जाने देती; हमारा एक्सपायरी रजिस्टर फ़ॉर्मेट शुरू करने का आसान तरीका है।
Zivyaa कहां काम आता है
नया मेडिकल स्टोर अपने पहले महीने बिलिंग, बैच, एक्सपायरी डेट और रजिस्टर में लगाता है, और अक्सर ये तीन अलग-अलग जगह होते हैं। Zivyaa का फ़ार्मेसी सॉफ़्टवेयर इस तरह बनाया जा रहा है कि ये सब एक ही रिकॉर्ड में रहें: बिल, वह किस बैच से आया, उसकी एक्सपायरी, और बिक्री के साथ ही शेड्यूल H1 की एंट्री।
अभी कुछ भी लॉन्च नहीं हुआ है। अगर आप उत्तर प्रदेश में स्टोर खोल रहे हैं और देखना चाहते हैं कि हम इसे कैसे बना रहे हैं, तो प्राइसिंग देखिए या वॉकथ्रू बुक कीजिए।




