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HFR और HPR रजिस्ट्रेशन कैसे करें (2026): क्लीनिक, हॉस्पिटल और मेडिकल स्टोर के लिए स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

Zivyaa Editorial Team28 September 20264 views
ABDMHFRHPRRegistrationCompliance
डेस्क पर ऑनलाइन फ़ॉर्म भरता क्लीनिक का कर्मचारी, कीबोर्ड के पास आधार कार्ड और फ़ोन

HFR और HPR के पोर्टल अब एक ही पते पर आ गए हैं, और ज़्यादातर गाइड अब भी पुराने पते बताती हैं। अभी का सही तरीका, स्टेप-बाय-स्टेप, और वेरिफ़ायर असल में क्या देखता है।

10 सितंबर 2026 तक, ABDM के पब्लिक डैशबोर्ड पर 5,74,159 हेल्थ फ़ैसिलिटी, हेल्थ फ़ैसिलिटी रजिस्ट्री में वेरिफ़ाई हो चुकी थीं, और 10,91,380 हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल्स, प्रोफ़ेशनल्स की रजिस्ट्री में। इन सबकी शुरुआत एक ही तरह हुई: आधार से जुड़ा एक फ़ोन, एक सरकारी फ़ॉर्म, और कहीं बैठा एक वेरिफ़ायर, जिसे मानना था कि भरी गई जानकारी सही है।

प्रोसेस मुश्किल नहीं है। मुश्किल यह है कि इसकी गाइडें पुरानी हो गई हैं। ज़्यादातर अब भी hfr.abdm.gov.in या hpr.abdm.gov.in पर भेजती हैं, जबकि ये दोनों पते अब एक ही पोर्टल पर खुलते हैं — नेशनल हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स रजिस्ट्री (NHPR), यानी nhpr.abdm.gov.in। स्क्रीन भी उसी के साथ बदल गई हैं। यहां अभी का सही तरीका है: हर स्टेप में क्या चाहिए, और अर्ज़ी कहां अटकती है।

छोटा जवाब: HFR में हेल्थ फ़ैसिलिटी (क्लीनिक, हॉस्पिटल, लैब, मेडिकल स्टोर) का रजिस्ट्रेशन होता है और HPR में हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल (डॉक्टर, नर्स, फ़ार्मासिस्ट) का। दोनों की शुरुआत अब nhpr.abdm.gov.in से होती है। पहले आधार या दूसरे KYC से हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल ID बनाइए, फिर प्रोफ़ेशनल या फ़ैसिलिटी का फ़ॉर्म भरिए और वेरिफ़िकेशन के लिए जमा कीजिए। HPR को आपकी काउंसिल वेरिफ़ाई करती है, और HFR को आपके ज़िले का वेरिफ़ायर।

HFR और HPR क्या हैं?

HFR यानी हेल्थ फ़ैसिलिटी रजिस्ट्री, ABDM के तहत देश की हेल्थ फ़ैसिलिटीज़ की राष्ट्रीय सूची है — सरकारी भी, प्राइवेट भी, एलोपैथी भी और आयुर्वेद जैसी पारंपरिक पद्धतियां भी। नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) की HFR वाली SOP के मुताबिक, रजिस्टर होने वाली हर फ़ैसिलिटी को 12 अंकों की एक अलग हेल्थ फ़ैसिलिटी ID मिलती है, जैसे IN0123456789। HPR यानी हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल्स रजिस्ट्री, लोगों की ऐसी ही सूची है: NHPR पोर्टल के मुताबिक इसमें हर चिकित्सा पद्धति के डॉक्टर, नर्स और फ़ार्मासिस्ट आते हैं।

दोनों ABDM की बुनियादी कड़ियां हैं। ABDM सरकार का वह ढांचा है जिससे मरीज़ की मंज़ूरी से उसके हेल्थ रिकॉर्ड एक जगह से दूसरी जगह जा सकते हैं। इन्हीं रजिस्ट्रियों की वजह से हॉस्पिटल का सॉफ़्टवेयर, डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन और मरीज़ का रिकॉर्ड, सब एक ही फ़ैसिलिटी और एक ही डॉक्टर की तरफ़ इशारा कर पाते हैं। तीसरी कड़ी मरीज़ की अपनी ID है, यानी ABHA — और हमने अलग से समझाया है कि ABHA कार्ड और आयुष्मान कार्ड एक चीज़ क्यों नहीं हैं, क्योंकि ज़्यादातर रिसेप्शन पर सबसे पहले यही उलझन सामने आती है।

इनमें से कोई भी रजिस्ट्री लाइसेंस नहीं है। NHA की SOP साफ़ कहती है कि HFR का काम फ़ैसिलिटीज़ को रेगुलेट करना या उनके मानक तय करना नहीं है; यह काम क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट, 2010 जैसे क़ानूनों का है। HFR ID राज्य के क़ानून के तहत क्लीनिक के रजिस्ट्रेशन की जगह नहीं लेती, और यह कोई क्वालिटी सर्टिफ़िकेट भी नहीं है।

HFR और HPR में कौन रजिस्टर कर सकता है?

HFR में लगभग हर तरह की फ़ैसिलिटी रजिस्टर हो सकती है। NHA की SOP में 34 तरह की फ़ैसिलिटीज़ की सूची है, जिनमें हॉस्पिटल, क्लीनिक, डेंटल क्लीनिक, डायग्नोस्टिक लैब, इमेजिंग सेंटर, फ़ार्मेसी यानी मेडिकल स्टोर, ब्लड बैंक, डायलिसिस सेंटर और फ़िज़ियोथेरेपी क्लीनिक शामिल हैं। NHPR पोर्टल के मुताबिक HPR में एलोपैथी, डेंटिस्ट्री, आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी के डॉक्टर, और साथ में नर्स और फ़ार्मासिस्ट रजिस्टर कर सकते हैं। योग और नेचुरोपैथी वालों के लिए पोर्टल पर अलग लिंक है, और एलाइड हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल्स के लिए अलग पोर्टल है: ahpr.abdm.gov.in।

क्रम ज़रूरी है, और लोग अक्सर यहीं अटकते हैं। फ़ैसिलिटी को एक इंसान रजिस्टर करता है — फ़ैसिलिटी मैनेजर — और फ़ैसिलिटी का फ़ॉर्म खुलने से पहले उसकी अपनी हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल ID होनी चाहिए। एक डॉक्टर वाले क्लीनिक में मैनेजर आमतौर पर डॉक्टर ख़ुद होते हैं। हॉस्पिटल में अक्सर कोई एडमिनिस्ट्रेटर। दोनों ही सूरत में पहले इंसान, फिर बिल्डिंग।

शुरू करने से पहले क्या तैयार रखें?

पोर्टल खोलने से पहले ये चीज़ें पास रख लीजिए, क्योंकि हर स्टेप OTP के भरोसे चलता है:

  • आधार, और उससे जुड़ा मोबाइल नंबर। पोर्टल दूसरे KYC का विकल्प भी देता है; 2022 की एक PIB रिलीज़ के मुताबिक प्रोफ़ेशनल्स ड्राइविंग लाइसेंस से भी रजिस्टर कर सकते हैं।
  • अकाउंट के लिए एक ईमेल और एक मोबाइल नंबर।
  • HPR के लिए: काउंसिल का रजिस्ट्रेशन नंबर, डिग्रियां, और आप कहां काम करते हैं।
  • HFR के लिए: फ़ैसिलिटी का नाम ठीक वैसा जैसा बोर्ड पर लिखा है, फ़ैसिलिटी सरकारी है या प्राइवेट, कौन सी चिकित्सा पद्धति, फ़ैसिलिटी का टाइप और सब-टाइप, पिन कोड के साथ पूरा पता, कौन-कौन सी सेवाएं, बेड और बाकी सुविधाएं।
  • ज़रूरी नहीं, पर काम की चीज़ें: बिल्डिंग की फ़ोटो, नाम वाले बोर्ड की फ़ोटो और पते का सबूत।
  • आख़िर में ई-साइन के लिए फिर से आधार से जुड़ा फ़ोन।

हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल ID कैसे बनाएं?

हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल ID वह लॉगिन है जिस पर बाकी सब टिका है। NHA की SOP में इसके स्टेप दिए हैं; पोर्टल बदलने के साथ बटन के नाम बदले हैं, क्रम नहीं:

  1. nhpr.abdm.gov.in खोलिए, Login/Registration चुनिए, फिर रजिस्टर करके हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल ID बनाने वाला विकल्प चुनिए।
  2. आधार से ID बनाने का विकल्प चुनिए, आधार नंबर डालिए, सहमति दीजिए और कैप्चा भरिए।
  3. आधार से जुड़े मोबाइल पर आया OTP डालिए।
  4. अकाउंट के लिए मोबाइल नंबर डालिए और दूसरे OTP से उसे वेरिफ़ाई कीजिए।
  5. एक फ़ॉर्म खुलेगा जिसमें नाम और जन्मतिथि आधार से अपने-आप भरी होगी। एक यूज़र ID चुनिए, ईमेल डालिए, पासवर्ड बनाइए और सबमिट कीजिए।
  6. आपकी हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल ID बनकर स्क्रीन पर दिखेगी। इसे लिख लीजिए।

डॉक्टर, नर्स या फ़ार्मासिस्ट HPR में रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

HPR में रजिस्ट्रेशन के लिए नई ID से लॉगिन कीजिए और प्रोफ़ेशनल फ़ॉर्म भरिए: अपनी जानकारी, काउंसिल रजिस्ट्रेशन, पढ़ाई और काम की जानकारी — जैसा NHPR पोर्टल बताता है। इसके बाद अर्ज़ी उस काउंसिल या बोर्ड के पास जाती है जिसमें आप रजिस्टर्ड हैं — मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग या फ़ार्मेसी काउंसिल, या आपकी चिकित्सा पद्धति का राष्ट्रीय आयोग — और PIB के मुताबिक वही काउंसिल इसे वेरिफ़ाई करती हैं।

काउंसिल आपके फ़ॉर्म को अपने रिकॉर्ड से मिलाती है, इसलिए सबसे ज़रूरी वही बातें हैं जो उसके पास दर्ज हैं: रजिस्ट्रेशन नंबर, काउंसिल का नाम, और आपका नाम ठीक वैसा जैसा काउंसिल में लिखा है। अगर आधार और काउंसिल के रिकॉर्ड में नाम की स्पेलिंग अलग है, तो उसे सबमिट करने से पहले ठीक करा लीजिए, सवाल वापस आने के बाद नहीं।

क्लीनिक, हॉस्पिटल या मेडिकल स्टोर का HFR रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

फ़ैसिलिटी को उसका मैनेजर, उसी हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल ID से रजिस्टर करता है। NHA की SOP में ये स्टेप हैं:

  1. लॉगिन कीजिए और Facility Manager का रोल चुनिए।
  2. Register a new facility चुनिए और फ़ैसिलिटी का नाम, राज्य, ज़िला, शहर और पता भरिए।
  3. अगर पोर्टल मिलती-जुलती फ़ैसिलिटीज़ दिखाए, तो उन्हें देख लीजिए। अगर आपकी फ़ैसिलिटी पहले से दर्ज है, तो नई बनाने के बजाय उसी को चुनिए।
  4. हर ज़रूरी खाना (* वाला) भरिए: फ़ैसिलिटी की जानकारी, सरकारी या प्राइवेट, चिकित्सा पद्धति, फ़ैसिलिटी का टाइप और सब-टाइप, पता, पिन कोड, नक्शे पर लोकेशन, सेवाएं और सुविधाएं।
  5. फ़ॉर्म एक बार फिर देखिए, C-DAC की ई-साइन सेवा से साइन कीजिए और सबमिट कीजिए।
  6. फ़ैसिलिटी को उसी वक़्त 12 अंकों की हेल्थ फ़ैसिलिटी ID मिल जाती है, और वह पोर्टल की पब्लिक सर्च में दिखने लगती है। वेरिफ़िकेशन इसके बाद होता है।

फ़ॉर्म की हर चीज़ वेरिफ़ायर नहीं जांचता। SOP के मुताबिक वेरिफ़ायर नाम, सरकारी या प्राइवेट, चिकित्सा पद्धति, फ़ैसिलिटी का टाइप, पता और नक्शे पर लोकेशन जांचता है। बेड, सेवाएं, खुलने का समय, और यहां तक कि फ़ैसिलिटी ABDM-compliant सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल करती है या नहीं — ये सब मैनेजर ख़ुद भरता है और इनकी ज़िम्मेदारी ख़ुद लेता है (self-certified)। मतलब इनकी गारंटी आप दे रहे हैं, इसलिए इन्हें ध्यान से भरिए, जल्दबाज़ी में नहीं।

HFR वेरिफ़िकेशन में कितना समय लगता है, और अर्ज़ी कहां अटकती है?

NHA की SOP वेरिफ़ायर से कहती है कि HFR की अर्ज़ी जमा होने के 30 दिन के अंदर उसे वेरिफ़ाई या रिजेक्ट करें। प्राइवेट और राज्य सरकार की फ़ैसिलिटीज़ को ज़िले के वेरिफ़ायर वेरिफ़ाई करते हैं, जिन्हें राज्य के ABDM मिशन डायरेक्टर नियुक्त करते हैं; केंद्र सरकार के मंत्रालयों की फ़ैसिलिटीज़ नेशनल वेरिफ़ायर के पास जाती हैं। वेरिफ़ाई होने के बाद फ़ैसिलिटी ABDM के पब्लिक डैशबोर्ड पर दिखने लगती है।

SOP वेरिफ़ायर को यह भी बताती है कि कुछ गड़बड़ लगे तो क्या करें: सीधे रिजेक्ट करने के बजाय सवाल (query) भेजें, जो खाने ज़रूरी नहीं हैं उनकी वजह से रिजेक्ट न करें, डुप्लीकेट फ़ैसिलिटी को मंज़ूरी न दें, और ऐसी फ़ैसिलिटी वेरिफ़ाई न करें जिसका पता नक्शे की लोकेशन से मेल न खाए। इस सूची को अर्ज़ी देने वाले की नज़र से पढ़िए, तो यह एक चेकलिस्ट बन जाती है। नक्शे पर पिन ठीक अपनी बिल्डिंग पर लगाइए। बोर्ड पर लिखा पूरा नाम डालिए, छोटा नाम नहीं। सवाल आए तो जल्दी जवाब दीजिए, क्योंकि जिस सवाल का जवाब नहीं गया, वह अर्ज़ी बस इंतज़ार करती रहती है।

HFR ID मिलने के बाद क्या करें?

HFR ID से फ़ैसिलिटी देश के नक्शे पर आ जाती है, लेकिन सिर्फ़ इससे एक भी रिकॉर्ड कहीं नहीं जाता। मरीज़ों और दूसरे डॉक्टरों-हॉस्पिटलों के साथ रिकॉर्ड का लेन-देन करने के लिए ऐसा सॉफ़्टवेयर चाहिए जिसमें ABDM के इंटीग्रेशन हों — जैसे विज़िट को मरीज़ के ABHA से जोड़ना, और मरीज़ की मंज़ूरी से आई रिकॉर्ड की मांग का जवाब देना। इसीलिए HFR फ़ॉर्म पूछता है कि फ़ैसिलिटी ABDM-compliant सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल करती है या नहीं, और इसीलिए हर सॉफ़्टवेयर कंपनी से कहिए कि वह ये काम करके दिखाए, सिर्फ़ बताए नहीं। क्लीनिक सॉफ़्टवेयर चुनते समय ABDM इंटीग्रेशन का असली मतलब क्या होना चाहिए, इस पर हमने अलग से लिखा है।

फ़ैसिलिटी की ID और हर डॉक्टर की प्रोफ़ेशनल ID ऐसी जगह रखिए जहां रिसेप्शन को तुरंत मिल जाएं। पोर्टल की पब्लिक सर्च में अपनी लिस्टिंग एक बार देख लीजिए — मरीज़ भी डॉक्टर या फ़ैसिलिटी इसी से ढूंढते हैं। और अगर पोर्टल में दिक्कत आए, तो NHA का टोल-फ़्री नंबर है 1800-11-4477, या 14477।

Zivyaa कहां काम आता है

रजिस्ट्रेशन फ़ैसिलिटी को ख़ुद करना होता है — सरकारी पोर्टल पर, अपने आधार और अपने साइन से। कोई सॉफ़्टवेयर आपकी जगह यह नहीं करना चाहिए, Zivyaa भी नहीं। सॉफ़्टवेयर का काम इसके बाद शुरू होता है: जो ID आपको अभी मिली हैं, वे रजिस्ट्रेशन, रिकॉर्ड और बिल में हर जगह एक जैसी इस्तेमाल हों, न कि हर डेस्क पर हाथ से दोबारा टाइप हों।

यही दूसरा हिस्सा है जिसके लिए Zivyaa बनाया जा रहा है। ABDM इंटीग्रेशन अभी सिर्फ़ योजना में है — यह न लाइव है और न सर्टिफ़ाइड, और अभी कुछ भी लॉन्च नहीं हुआ है। अगर आप अभी अपनी फ़ैसिलिटी रजिस्टर कर रहे हैं और देखना चाहते हैं कि आगे के काम को हम कैसे बना रहे हैं, तो प्राइसिंग देखिए या एक वॉकथ्रू बुक कीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

HFR और HPR की फ़ुल फ़ॉर्म क्या है?+

HFR यानी हेल्थ फ़ैसिलिटी रजिस्ट्री और HPR यानी हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल्स रजिस्ट्री। दोनों ABDM का हिस्सा हैं और अब एक ही पोर्टल से खुलती हैं: नेशनल हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स रजिस्ट्री, nhpr.abdm.gov.in।

क्या मेडिकल स्टोर का HFR रजिस्ट्रेशन हो सकता है?+

हां। HFR में फ़ार्मेसी भी एक फ़ैसिलिटी टाइप है, और स्टोर चलाने वाला व्यक्ति फ़ैसिलिटी मैनेजर बनकर इसे रजिस्टर करता है। फ़ार्मासिस्ट ख़ुद भी HPR में रजिस्टर कर सकते हैं — NHPR पोर्टल उन्हें डॉक्टर और नर्स के साथ गिनता है।

HFR वेरिफ़िकेशन में कितना समय लगता है?+

NHA की SOP वेरिफ़ायर से कहती है कि अर्ज़ी जमा होने के 30 दिन के अंदर उसे वेरिफ़ाई या रिजेक्ट करें। वेरिफ़ायर कोई सवाल भेजे, तो जवाब देने तक अर्ज़ी रुकी रहती है, इसलिए जल्दी जवाब दीजिए।

क्या HFR ID क्लीनिक चलाने का लाइसेंस है?+

नहीं। NHA की SOP कहती है कि HFR का काम फ़ैसिलिटीज़ को रेगुलेट करना या उनके मानक तय करना नहीं है। क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट, 2010 जैसे क़ानूनों के तहत लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन अलग रहते हैं।

HFR ID कैसी दिखती है?+

IN से शुरू होने वाली 12 अंकों की ID, जैसे IN0123456789। यह फ़ॉर्म सबमिट करते ही मिल जाती है, वेरिफ़िकेशन से पहले।

HPR की अर्ज़ी कौन वेरिफ़ाई करता है?+

PIB के मुताबिक वह काउंसिल या बोर्ड जिसमें आप रजिस्टर्ड हैं — जैसे मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग या फ़ार्मेसी काउंसिल। इसलिए काउंसिल का रजिस्ट्रेशन नंबर और आपका नाम, काउंसिल के रिकॉर्ड से मेल खाना चाहिए।

स्रोत

  1. Health Facility Registry — Standard Operating Procedures for Verifiers (NHA)
  2. National Healthcare Providers Registry (NHPR) portal — NHA
  3. NHA rolls out Nurse Module of Health Professional Registry — PIB, 27 April 2022
  4. ABDM public dashboard

Research and drafting for this article were assisted by AI. Editorial responsibility, review and final approval rest with Zivyaa.

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