मई 2026 में उत्तर प्रदेश ने आयुष्मान भारत के तहत क़रीब 100 प्राइवेट हॉस्पिटलों का पेमेंट रोक दिया और क़रीब 100 और हॉस्पिटलों को स्कीम से सस्पेंड कर दिया — यह उन रिपोर्टों के मुताबिक है जिनमें UP में PM-JAY चलाने वाली एजेंसी SACHIS की CEO का बयान छपा। इन हॉस्पिटलों की गलती इलाज में नहीं थी। उन्होंने नए हॉस्पिटल एम्पैनलमेंट मॉड्यूल, यानी HEM 2.0 पर शिफ़्ट नहीं किया था — और HEM 2.0 के 35 मानकों में हेल्थ फ़ैसिलिटी रजिस्ट्री (HFR) पर रजिस्ट्रेशन भी शामिल है।
यह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अपनी बात से मेल नहीं खाता लगता। दिसंबर 2024 के एक अपडेट में PIB ने साफ़ कहा कि ABDM स्वैच्छिक (voluntary) है। दोनों बातें सही हैं। ये अलग-अलग सवालों के जवाब हैं, और गोरखपुर या बस्ती के किसी हॉस्पिटल मालिक को जानना चाहिए कि उन पर कौन सी बात लागू होती है।
छोटा जवाब: पूरे भारत में ABDM स्वैच्छिक है — कोई राष्ट्रीय नियम किसी हॉस्पिटल, क्लीनिक या मरीज़ को इससे जुड़ने के लिए मजबूर नहीं करता। लेकिन स्वैच्छिक का मतलब यह नहीं कि असल में छोड़ा जा सकता है। UP में स्कीम चलाने वाली एजेंसी के मुताबिक, वहां PM-JAY में एम्पैनल्ड हॉस्पिटलों को अब HEM 2.0 के मानक पूरे करने होंगे, जिनमें HFR रजिस्ट्रेशन भी है। राष्ट्रीय नियम से ज़्यादा यह मायने रखता है कि आपकी स्कीम और आपका राज्य क्या मांगता है।
क्या भारत में ABDM अनिवार्य है?
नहीं। ABDM यानी आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, सरकार का वह ढांचा है जिससे मरीज़ की मंज़ूरी से उसके हेल्थ रिकॉर्ड अलग-अलग डॉक्टरों और हॉस्पिटलों के बीच जुड़ सकते हैं, और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इसे स्वैच्छिक बताता है: 17 दिसंबर 2024 की PIB रिलीज़ कहती है कि ABDM स्वैच्छिक है। मरीज़ों के लिए, 6 फ़रवरी 2024 का PIB अपडेट ABHA — यानी मरीज़ की हेल्थ ID — के बारे में भी यही कहता है: इसे बनवाना स्वैच्छिक है।
ABDM से जुड़ना किसी फ़ैसिलिटी को लाइसेंस भी नहीं देता। हेल्थ फ़ैसिलिटी रजिस्ट्री पर नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) की SOP कहती है कि HFR का काम फ़ैसिलिटीज़ को रेगुलेट करना या उनके मानक तय करना नहीं है; यह काम क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट, 2010 जैसे क़ानूनों और राज्य के नियमों का है। कोई क्लीनिक ABDM से जुड़े या न जुड़े, राज्य के क़ानून के तहत उसका रजिस्ट्रेशन तो ज़रूरी रहता ही है।
फिर UP के हॉस्पिटलों से HFR पर रजिस्टर करने को क्यों कहा जा रहा है?
क्योंकि कोई स्कीम वह शर्त लगा सकती है जो क़ानून नहीं लगाता। PM-JAY, यानी पात्र परिवारों के लिए आयुष्मान भारत का कैशलेस इलाज, उत्तर प्रदेश में SACHIS (स्टेट एजेंसी फ़ॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज़) चलाती है। फ़्री प्रेस जर्नल (15 मई 2026) और मेडिकल बायर (18 मई 2026) की रिपोर्टों के मुताबिक, SACHIS की CEO ने कहा कि एम्पैनल्ड हॉस्पिटलों को अब HEM 2.0 के तहत 35 मानक पूरे करने होंगे, जिनमें हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट, फ़ायर सेफ़्टी NOC, ज़रूरी इंफ़्रास्ट्रक्चर, डॉक्टरों की योग्यता और HFR रजिस्ट्रेशन शामिल हैं।
इन्हीं रिपोर्टों में, और 16 मई 2026 को मेडिकल डायलॉग्स में, बताया गया कि HEM 2.0 पोर्टल पर शिफ़्ट न करने वाले हॉस्पिटलों के साथ क्या हुआ: क़रीब 100 प्राइवेट हॉस्पिटलों का पेमेंट रुका, और क़रीब 100 और स्कीम से सस्पेंड हुए। जिस हॉस्पिटल की कमाई PM-JAY के मरीज़ों पर टिकी है, उसके लिए इससे ज़्यादा अनिवार्य कुछ नहीं हो सकता।
यह फ़र्क़ समझना ज़रूरी है। HFR ID न होने पर किसी क्लीनिक पर जुर्माना नहीं लग रहा। हो यह रहा है कि एक सरकारी स्कीम ने अपने साथ बने रहने की शर्त में इसे जोड़ दिया है — और UP के बहुत से प्राइवेट हॉस्पिटलों के लिए कारोबार के हिसाब से वह स्कीम छोड़ना कोई विकल्प नहीं है।
जो छोटा क्लीनिक PM-JAY में नहीं है, क्या उसे ABDM चाहिए?
जो क्लीनिक PM-JAY या किसी दूसरी सरकारी स्कीम में नहीं है, उसके लिए ABDM से जुड़ना ज़रूरी करने वाला कोई राष्ट्रीय नियम हमें नहीं मिला; सरकार की घोषित राष्ट्रीय स्थिति यही है कि ABDM स्वैच्छिक है। जांचने वाली बात है आपका अपना राज्य और वह स्कीम जिसमें आप जुड़ना चाहते हैं, क्योंकि वे ऐसी शर्तें जोड़ सकते हैं जो राष्ट्रीय नियम में नहीं हैं — और किसी सॉफ़्टवेयर वाले का बताया हुआ नियम, असली नियम नहीं होता।
फिर भी कोई क्लीनिक अपनी मर्ज़ी से रजिस्टर कर सकता है। वह उस राष्ट्रीय सर्च में दिखने लगता है जिससे मरीज़ डॉक्टर और क्लीनिक ढूंढते हैं, उसके डॉक्टर प्रोफ़ेशनल्स की रजिस्ट्री में वेरिफ़ाई हो जाते हैं, और अगर कल कोई स्कीम इसकी मांग करे तो वह पहले से तैयार रहता है। ये फ़ायदे के फ़ैसले हैं, मजबूरी नहीं।
हॉस्पिटल के लिए ABDM कंप्लायंस में असल में क्या-क्या आता है?
हॉस्पिटल के लिए ABDM कंप्लायंस की तीन परतें हैं, जिन्हें अक्सर एक ही चीज़ मान लिया जाता है। पहली है पहचान: फ़ैसिलिटी HFR पर और उसके डॉक्टर HPR पर। दूसरी है मरीज़ की ID: रजिस्ट्रेशन के वक़्त, जो मरीज़ चाहें उनका ABHA बनाना या जोड़ना। तीसरी है रिकॉर्ड का लेन-देन: मरीज़ की मंज़ूरी से रिकॉर्ड किसी दूसरे डॉक्टर-हॉस्पिटल के पास या मरीज़ के अपने ऐप में जाना।
तीसरी परत को लोग सबसे ज़्यादा ग़लत समझते हैं। रिकॉर्ड किसी सरकारी डेटाबेस में नहीं जाते। अप्रैल 2024 का एक PIB एक्सप्लेनर बताता है कि ABDM का ढांचा फ़ेडरेटेड है — रिकॉर्ड वहीं रहते हैं जहां बने, यानी हॉस्पिटल में — और मरीज़ चाहे तो सब कुछ नहीं, सिर्फ़ चुने हुए रिकॉर्ड शेयर करने की मंज़ूरी दे सकता है। अगस्त 2025 की PIB रिलीज़ के मुताबिक, हेल्थ डेटा का लेन-देन सिर्फ़ मरीज़ की मंज़ूरी के बाद होता है। रिसेप्शन पर इसका मतलब है पूछना, मान लेना नहीं: कौन से रिकॉर्ड, किसके साथ, इस विज़िट के लिए।
रिपोर्टों के मुताबिक HEM 2.0 सिर्फ़ पहली परत, यानी HFR रजिस्ट्रेशन का नाम लेता है। दूसरी और तीसरी परत ही ABDM का असली मक़सद हैं, और वहीं सॉफ़्टवेयर की ज़रूरत पड़ती है।
क्या मरीज़ों के लिए ABHA अनिवार्य है?
नहीं। फ़रवरी 2024 का PIB अपडेट कहता है कि ABHA नंबर बनवाना स्वैच्छिक है। हॉस्पिटल मरीज़ का ABHA बनाने या जोड़ने की पेशकश कर सकता है, लेकिन इसके लिए इलाज नहीं रोकना चाहिए। और ABHA, आयुष्मान कार्ड नहीं है — ABHA होने से कोई PM-JAY में शामिल नहीं हो जाता। रिसेप्शन पर सबसे ज़्यादा यही उलझन आती है, और ABHA कार्ड और आयुष्मान कार्ड का फ़र्क़ हमने अलग से समझाया है।
UP के PM-JAY हॉस्पिटल को सबसे पहले क्या करना चाहिए?
शुरुआत उस बात से कीजिए जिससे बाकी सब तय होता है — HEM 2.0 आप पर लागू होता है या नहीं — और फिर इस क्रम में आगे बढ़िए। रजिस्ट्रेशन के लिए अलग से HFR और HPR रजिस्ट्रेशन की स्टेप-बाय-स्टेप गाइड है।
- पक्का कीजिए कि आप PM-JAY में एम्पैनल्ड हैं या होना चाहते हैं। अगर हां, तो HEM 2.0 आप पर लागू है।
- NHPR पोर्टल से फ़ैसिलिटी को HFR पर रजिस्टर कीजिए। पहले फ़ैसिलिटी मैनेजर की हेल्थकेयर प्रोफ़ेशनल ID बनती है, फिर फ़ैसिलिटी का फ़ॉर्म।
- अपने डॉक्टरों को HPR पर लाइए, ताकि फ़ैसिलिटी में काम करने वाले प्रोफ़ेशनल्स उनकी काउंसिल से वेरिफ़ाई हो जाएं।
- HEM 2.0 के मानक किसी कंसल्टेंट की लिस्ट से नहीं, SACHIS की अपनी लिस्ट से मिलाइए। रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट, फ़ायर NOC, इंफ़्रास्ट्रक्चर और डॉक्टरों की योग्यता भी HFR के साथ उसी लिस्ट में हैं, और इनमें से कोई भी सॉफ़्टवेयर से हल नहीं होता।
- जो कुछ जमा करें, उसकी तारीख़ वाली कॉपी रखिए। जब सवाल यह हो कि हॉस्पिटल ने समय पर शिफ़्ट किया या नहीं, तो तारीख़ ही सबूत होती है।
अगर कोई कहे कि ABDM अनिवार्य है, तो क्या पूछें?
दस्तावेज़ मांगिए। जो शर्त सच में है, उसे किसी संस्था ने जारी किया होता है, उस पर तारीख़ होती है, आमतौर पर एक ऑर्डर या सर्कुलर नंबर होता है, और उसमें लिखा होता है कि वह किस पर लागू है — राज्य के हर हॉस्पिटल पर, सिर्फ़ एम्पैनल्ड हॉस्पिटलों पर, या किसी ख़ास स्कीम पर। इन चार बातों के बिना "सरकार ने अनिवार्य कर दिया है" एक सेल्स लाइन है, चाहे कोई भी कहे।
यह इसलिए ज़रूरी है क्योंकि अक्सर सबसे ज़्यादा दबाव वही लोग बनाते हैं जो इसका हल बेच रहे होते हैं। हो सकता है कोई कंसल्टेंट या सॉफ़्टवेयर वाला सही कह रहा हो कि आपके हॉस्पिटल को HFR रजिस्ट्रेशन चाहिए; अगर आप UP में PM-JAY पर हैं, तो ऊपर की रिपोर्टें यही बताती हैं। लेकिन ठीक-ठीक क्या चाहिए और कब तक, यह ऑर्डर ही बताता है, और किसी को समझाने के पैसे देने से पहले उसे ख़ुद पढ़ लेना चाहिए।
क्या ABDM कंप्लायंस के लिए ख़ास सॉफ़्टवेयर चाहिए?
HFR और HPR रजिस्ट्रेशन के लिए नहीं। दोनों सरकारी पोर्टल पर होते हैं — फ़ैसिलिटी मैनेजर और हर प्रोफ़ेशनल अपने-अपने आधार से करते हैं। रिकॉर्ड के लेन-देन के लिए चाहिए: किसी विज़िट को मरीज़ के ABHA से जोड़ना और मंज़ूरी पर आई रिकॉर्ड की मांग का जवाब देना, इसके लिए ऐसा सॉफ़्टवेयर चाहिए जिसमें ABDM के इंटीग्रेशन हों। जब कोई सॉफ़्टवेयर कंपनी अपने प्रोडक्ट को ABDM compliant बताए, तो पूछिए कि इनमें से कौन से काम आज चल रहे हैं, और एक काम चलता हुआ दिखाने को कहिए, सिर्फ़ बताने को नहीं।
जिस ग़लती से बचना है, वह है रजिस्ट्रेशन की समस्या सुलझाने के लिए सॉफ़्टवेयर ख़रीद लेना। जो हॉस्पिटल HEM 2.0 में पीछे है, वह आमतौर पर काग़ज़ों में पीछे है — रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट, फ़ायर NOC, HFR ID — और कोई प्रोडक्ट इसे ठीक नहीं करता। सॉफ़्टवेयर का काम इसके बाद आता है, जब रिकॉर्ड को एक जगह से दूसरी जगह जाना होता है।
Zivyaa कहां काम आता है
Zivyaa गोरखपुर का है, और इस कहानी वाले हॉस्पिटल ही वे हैं जिनके लिए इसे बनाया जा रहा है: UP के छोटे शहरों के प्राइवेट हॉस्पिटल, जिनमें से कई PM-JAY पर हैं, जहां रजिस्ट्रेशन तो सरकारी पोर्टल का काग़ज़ी काम है और मुश्किल हिस्सा उसके बाद रिकॉर्ड को ठीक रखना है।
ABDM इंटीग्रेशन इस योजना का हिस्सा है, और सच यह है कि यह अभी सिर्फ़ योजना में है — न लाइव है, न सर्टिफ़ाइड, और अभी कुछ भी लॉन्च नहीं हुआ है। अगर आप अभी HEM 2.0 पर काम कर रहे हैं और देखना चाहते हैं कि उसके बाद वाले काम को हम कैसे बना रहे हैं, तो प्राइसिंग देखिए या एक वॉकथ्रू बुक कीजिए।




